अहोई अष्टमी पूजा

अहोई अष्टमी पूजा एक व्रत है जो माताएँ अपने बच्चों की भलाई और दीर्घायु के लिए रखती हैं, इसमें देवी अहोई भगवती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

60 min फिजिकल Ekadashi & Vrat Pujas

क्यों करें अहोई अष्टमी पूजा?

  • माता के बच्चों के लिए दीर्घायु, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करता है
  • भक्ति के माध्यम से माँ-बच्चे के बंधन को मज़बूत करता है
  • पीढ़ियों से चली आ रही एक प्रिय पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाता है

कब करें अहोई अष्टमी पूजा ?

यह अहोई अष्टमी के दिन मनाया जाता है, जो कार्तिक मास में दीवाली से आठ दिन पहले आती है।

कैसे की जाती है अहोई अष्टमी पूजा ?

  1. संकल्प और व्रत
    माता संकल्प लेती हैं और पूरे दिन व्रत रखती हैं।
  2. अहोई माता पूजा
    दीवार पर बने चित्र या मूर्ति के माध्यम से देवी अहोई भगवती की पूजा की जाती है, साथ ही बच्चों के लिए प्रार्थना की जाती है।
  3. तारे देखना
    शाम को तारे देखने के बाद व्रत खोला जाता है।

आवश्यक सामग्री

  • अहोई माता का चित्र या दीवार पर बनी आकृति
  • जल और कलश
  • व्रत खोलने के भोजन हेतु मिठाई और फल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहोई अष्टमी का व्रत कौन रखता है?

परंपरागत रूप से माताएँ अपने बच्चों की भलाई के लिए यह व्रत रखती हैं, हालांकि प्रथाएँ परिवार के अनुसार भिन्न होती हैं।

व्रत ठीक कब खोला जाता है?

आमतौर पर शाम को तारे देखने के बाद, करवा चौथ की भावना से मिलता-जुलता।

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