अस्थि विसर्जन पूजा

अस्थि विसर्जन दिवंगत व्यक्ति की अस्थियों को किसी पवित्र नदी में, परंपरागत रूप से गंगा में, विसर्जित करने का अनुष्ठान है, जो आत्मा की अंतिम यात्रा में एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतीक है।

60 min फिजिकल Death & Ancestral Rituals

क्यों करें अस्थि विसर्जन पूजा?

  • एक महत्वपूर्ण परंपरा को पूर्ण करता है जिसे दिवंगत आत्मा के लिए शांति लाने वाला माना जाता है
  • परिवार को एक सार्थक समापन अनुष्ठान प्रदान करता है
  • दिवंगत के अवशेषों को हिंदू परंपरा में पूजनीय पवित्र जल से जोड़ता है

कब करें अस्थि विसर्जन पूजा ?

आमतौर पर दाह संस्कार के कुछ दिनों से लेकर एक-दो सप्ताह के भीतर किया जाता है, हालांकि कभी-कभी परिवार परिस्थितियों के अनुसार अधिक समय भी लेते हैं।

कैसे की जाती है अस्थि विसर्जन पूजा ?

  1. संकल्प
    परिवार नदी तट पर पंडित जी के समक्ष अनुष्ठान का उद्देश्य बताते हुए संकल्प लेता है।
  2. प्रार्थना
    दिवंगत आत्मा की शांति का आह्वान करते हुए मंत्रोच्चार किया जाता है।
  3. विसर्जन
    अस्थियों को श्रद्धापूर्वक पवित्र नदी में विसर्जित किया जाता है।
  4. तर्पण
    दिवंगत को अंतिम श्रद्धांजलि के रूप में जल अर्पण किया जाता है।

आवश्यक सामग्री

  • अस्थियों वाला कलश
  • पुष्प और माला
  • पवित्र जल अर्पण
  • घाट पर अनुष्ठान का मार्गदर्शन करने हेतु एक पंडित

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या अस्थि विसर्जन विशेष रूप से गंगा में ही होना चाहिए?

गंगा इस अनुष्ठान के लिए सबसे परंपरागत रूप से पूजनीय नदी है, लेकिन इसे अन्य पवित्र नदियों में भी किया जा सकता है।

यदि परिवार यात्रा नहीं कर सकता तो क्या इसकी व्यवस्था की जा सकती है?

हाँ, दूरस्थ व्यवस्था विकल्पों सहित कई सेवाएं परिवार की ओर से उचित विधि-विधान के साथ विसर्जन करवाने की अनुमति देती हैं।

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+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो

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