भाई दूज पूजा
भाई दूज पूजा भाई-बहन के बंधन का उत्सव है, जिसमें बहनें तिलक समारोह करती हैं और अपने भाइयों की दीर्घायु व कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं।
30 min फिजिकल Festival Pujas क्यों करें भाई दूज पूजा?
- भाई-बहन के बंधन का उत्सव मनाता है और उसे मज़बूत करता है
- भाइयों के लिए दीर्घायु और सुरक्षा की कामना करता है
- दीवाली उत्सव अवधि का एक आनंदमय समापन दर्शाता है
कब करें भाई दूज पूजा ?
यह दीवाली के दूसरे दिन (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) मनाया जाता है।
कैसे की जाती है भाई दूज पूजा ?
- आरती और तिलक
बहन आरती करती है और भाई के माथे पर तिलक लगाती है।
- प्रार्थना
भाई की दीर्घायु और कल्याण के लिए प्रार्थना की जाती है।
- उपहार विनिमय
भाई प्रेम और कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में परंपरागत रूप से अपनी बहनों को उपहार देते हैं।
आवश्यक सामग्री
- तिलक (कुमकुम), चावल और एक दीया
- विनिमय हेतु मिठाइयां
- समारोह हेतु एक थाली
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या भाई दूज रक्षाबंधन के समान है?
दोनों भाई-बहन के बंधन का उत्सव मनाते हैं, लेकिन भाई दूज राखी बांधने के बजाय तिलक समारोह पर केंद्रित है, और दीवाली के तुरंत बाद आता है।
क्या यह पर्व तब भी मनाया जा सकता है जब भाई-बहन दूर रहते हों?
हाँ, जब वे व्यक्तिगत रूप से साथ नहीं हो सकते तो कई लोग वीडियो कॉल पर इसका सरल रूप मनाते हैं।
+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो
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