धनतेरस पूजा दीपावली पर्व के पहले दिन, धनतेरस पर संपन्न की जाती है, जिसमें धन, स्वास्थ्य और समृद्धि हेतु देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है।
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क्यों करें धनतेरस पूजा (संध्या)?
आने वाले वर्ष के लिए धन और समृद्धि का आह्वान करता है
चिकित्सा के देवता भगवान धन्वंतरि से स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है
दीपावली पर्व की शुभ शुरुआत का प्रतीक है
कब करें धनतेरस पूजा (संध्या) ?
यह दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस पर, सामान्यतः संध्या के समय संपन्न की जाती है।
कैसे की जाती है धनतेरस पूजा (संध्या) ?
संकल्प
परिवार पंडित जी के समक्ष पूजा के उद्देश्य को बताते हुए संकल्प लेता है।
लक्ष्मी-धन्वंतरि पूजा
देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा फूलों, दीयों और मंत्रों के साथ की जाती है।
नई खरीदारी का आशीर्वाद
धनतेरस पर खरीदे गए नए बर्तन, आभूषण या मूल्यवान वस्तुओं को देवताओं के समक्ष रखकर आशीर्वाद लिया जाता है।
आरती
अंत में आरती की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।
आवश्यक सामग्री
लक्ष्मी और धन्वंतरि की मूर्तियां या चित्र
दीये और तेल
फूल, कुमकुम और अक्षत
नए बर्तन या आभूषण (यदि खरीदे गए हों)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धनतेरस पर लोग सोना या बर्तन क्यों खरीदते हैं?
इस दिन घर में नई धातु की वस्तुएं लाना शुभ माना जाता है, जो आने वाले वर्ष के लिए धन और समृद्धि का प्रतीक है।
क्या धनतेरस और दीपावली एक ही हैं?
नहीं, धनतेरस दीपावली पर्व की पांच दिवसीय अवधि का पहला दिन है, जबकि मुख्य दीपावली के दिन अलग से लक्ष्मी पूजा की जाती है।
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+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो