दशहरा (विजया दशमी) पूजा असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव है, जो भगवान राम की रावण पर विजय तथा देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय का स्मरण कराती है।
60 min फिजिकल Festival Pujas
क्यों करें दशहरा / विजयादशमी पूजा?
असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव मनाता है
नवरात्रि उत्सव की समाप्ति को चिह्नित करता है
नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है
कब करें दशहरा / विजयादशमी पूजा ?
यह आश्विन मास में नवरात्रि के बाद दसवें दिन (दशमी) को मनाई जाती है।
कैसे की जाती है दशहरा / विजयादशमी पूजा ?
संकल्प
पूजा के उद्देश्य को बताते हुए संकल्प लिया जाता है।
शमी पूजा
शमी वृक्ष की पूजा की जाती है, जो पारंपरिक रूप से पांडवों की कथा से जुड़ी है।
रावण दहन (सामुदायिक)
कई क्षेत्रों में सार्वजनिक उत्सव के भाग के रूप में रावण के पुतले का विधिवत दहन किया जाता है।
आरती
अंत में आरती के साथ पूजा संपन्न होती है।
आवश्यक सामग्री
फूल, अक्षत और दीया
शमी के पत्ते (यदि उपलब्ध हों)
प्रसाद हेतु मिठाइयां
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या दशहरा पूरे भारत में एक समान तरीके से मनाया जाता है?
नहीं, रीति-रिवाज व्यापक रूप से भिन्न होते हैं — उत्तर भारत में रावण दहन से लेकर बंगाल में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन तक — परंतु सत्य की असत्य पर विजय का भाव सार्वभौमिक है।
यह दिन नई शुरुआत के लिए क्यों शुभ माना जाता है?
विजया दशमी का शाब्दिक अर्थ है 'विजयी दसवां', जो इसे हिंदू पंचांग में नई शुरुआत के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक बनाता है।
₹5,0002,10058% छूट
+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो