काली पूजा माता काली, दिव्य माँ के एक शक्तिशाली और उग्र रूप, का सम्मान करती है, जिनकी सुरक्षा, नकारात्मकता के नाश और आध्यात्मिक रूपांतरण हेतु पूजा की जाती है।
90 min फिजिकल Navratri & Devi Pujas
क्यों करें काली पूजा?
शक्तिशाली सुरक्षा और नकारात्मकता के नाश का आह्वान करती है
आध्यात्मिक रूपांतरण और आंतरिक शक्ति की कामना करती है
बंगाली और तांत्रिक भक्ति परंपराओं में विशेष महत्व रखती है
कब करें काली पूजा ?
काली पूजा की रात, जो दिवाली (कार्तिक मास की अमावस्या) के साथ पड़ती है, विशेष रूप से बंगाल में व्यापक रूप से मनाई जाती है।
कैसे की जाती है काली पूजा ?
संकल्प
पूजा का उद्देश्य बताते हुए संकल्प लिया जाता है।
काली पूजा
माता काली की, प्रायः रात में, फूलों, गुड़हल और मंत्रों सहित पूजा की जाती है।
हवन (वैकल्पिक)
गहरे आह्वान हेतु हवन भी शामिल किया जा सकता है।
आवश्यक सामग्री
माता काली की मूर्ति या चित्र
लाल गुड़हल के फूल
फूल, कुमकुम और एक दीया
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
काली पूजा दिवाली की उसी रात क्यों की जाती है?
बंगाल और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में, यह अमावस्या की रात शेष भारत में मनाई जाने वाली लक्ष्मी पूजा के बजाय काली पूजा को समर्पित है।
क्या काली पूजा सामान्य गृहस्थ के लिए उपयुक्त है?
हाँ, हालांकि इसका तांत्रिक परंपरा से गहरा संबंध है, अनेक परिवार सुरक्षा और शक्ति पर केंद्रित भक्तिपूर्ण संस्करण करते हैं।
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