करवा चौथ पूजा

करवा चौथ पूजा विवाहित महिलाओं द्वारा सूर्योदय से चंद्रोदय तक अपने पति की दीर्घायु और कल्याण हेतु व्रत रखकर मनाई जाती है, जिसमें प्रार्थना और पारंपरिक चंद्र-दर्शन की रस्म शामिल है।

90 min फिजिकल Ekadashi & Vrat Pujas

क्यों करें करवा चौथ पूजा?

  • पति की दीर्घायु और कल्याण की कामना करता है
  • साझा भक्ति के माध्यम से वैवाहिक बंधन को मजबूत करता है
  • एक प्रिय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा के रूप में मनाया जाता है

कब करें करवा चौथ पूजा ?

कार्तिक मास की पूर्णिमा के चार दिन बाद (सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर) करवा चौथ मनाई जाती है।

कैसे की जाती है करवा चौथ पूजा ?

  1. सरगी एवं संकल्प
    व्रत सूर्योदय से पहले सरगी भोजन के साथ शुरू होता है, उसके बाद दिनभर के व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  2. दिनभर का व्रत
    दिनभर बिना भोजन या जल के कठोर व्रत रखा जाता है।
  3. करवा चौथ कथा
    शाम को महिलाएँ करवा चौथ की कथा सुनने हेतु एकत्रित होती हैं।
  4. चंद्र-दर्शन
    चंद्रमा को देखने के बाद व्रत का पारण किया जाता है, सामान्यतः पति द्वारा जल का पहला घूंट पिलाया जाता है।

आवश्यक सामग्री

  • पूजा हेतु एक करवा (छोटा पात्र)
  • चंद्रमा देखने हेतु एक छलनी
  • मिठाइयाँ, फूल और पारंपरिक पूजा सामग्री

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या करवा चौथ पूरे दिन बिना पानी के मनाई जा सकती है?

परंपरागत रूप से हाँ, यह अधिक कठोर व्रतों में से एक है, हालांकि व्यक्तिगत स्वास्थ्य परिस्थितियों को सदैव प्राथमिकता देनी चाहिए — आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर से परामर्श करें।

यदि बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई न दे तो क्या करें?

अनेक लोग अपने शहर के लिए प्रकाशित आधिकारिक चंद्रोदय समय का पालन करते हैं और उसी अनुसार व्रत का पारण करते हैं।

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