लोहड़ी पूजा

लोहड़ी पूजा फसल कटाई और शीत ऋतु संक्रांति के समापन का उत्सव है, जिसमें अलाव, लोकगीत और अर्पण किए जाते हैं, तथा जो विशेष रूप से पंजाब और उत्तर भारत में अत्यंत प्रिय है।

60 min फिजिकल Festival Pujas

क्यों करें लोहड़ी पूजा?

  • फसल के मौसम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है
  • सर्दी से लंबे दिनों की ओर आनंदमय परिवर्तन का प्रतीक है
  • समुदाय को उत्सवमय अलाव के चारों ओर एक साथ लाती है

कब करें लोहड़ी पूजा ?

लोहड़ी के अवसर पर मनाई जाती है, जो सामान्यतः 13 जनवरी को, मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर आती है।

कैसे की जाती है लोहड़ी पूजा ?

  1. अलाव की तैयारी
    शाम को सामुदायिक या पारिवारिक अलाव तैयार कर जलाया जाता है।
  2. अर्पण
    कृतज्ञता की प्रार्थनाओं के साथ तिल, गुड़ और लाई (मुरमुरे) अग्नि में अर्पित किए जाते हैं।
  3. लोक उत्सव
    परिवार और समुदाय अलाव के चारों ओर लोकगीत और उल्लास के लिए एकत्र होते हैं।

आवश्यक सामग्री

  • अलाव हेतु लकड़ी
  • अर्पण हेतु तिल, गुड़, लाई और मूंगफली
  • बाँटने हेतु पारंपरिक मिठाइयाँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या लोहड़ी एक धार्मिक या सांस्कृतिक त्योहार है?

यह मुख्यतः एक सांस्कृतिक फसल-उत्सव है, विशेष रूप से पंजाब में, हालाँकि इसमें कृतज्ञता और प्रार्थना के भक्ति भाव भी सम्मिलित हैं।

क्या लोहड़ी मकर संक्रांति से जुड़ी हुई है?

हाँ, लोहड़ी मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर पड़ती है और दोनों मिलकर मौसमी फसल कटाई एवं संक्रांति परिवर्तन का उत्सव मनाते हैं।

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