मकर संक्रांति पूजा सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जो सूर्यदेव की प्रार्थना, पतंगबाजी और तिल-गुड़ की मिठाइयों के साथ पूरे भारत में मनाई जाती है।
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क्यों करें मकर संक्रांति पूजा?
एक शुभ खगोलीय एवं मौसमी परिवर्तन का प्रतीक है
स्वास्थ्य और ऊर्जा हेतु सूर्यदेव का आशीर्वाद आमंत्रित करती है
पूरे भारत में विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं के साथ हर्षोल्लास से मनाई जाती है
कब करें मकर संक्रांति पूजा ?
मकर संक्रांति पर मनाई जाती है, जो सामान्यतः 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है।
कैसे की जाती है मकर संक्रांति पूजा ?
संकल्प
पूजा का उद्देश्य बताते हुए संकल्प लिया जाता है।
सूर्य पूजा
प्रायः सूर्योदय के समय, प्रार्थना और अर्पण के साथ सूर्यदेव की पूजा की जाती है।
तिल-गुड़ अर्पण
संबंधों में मिठास के प्रतीक स्वरूप तिल और गुड़ की मिठाइयाँ अर्पित कर बाँटी जाती हैं।
आवश्यक सामग्री
तिल और गुड़ की मिठाइयाँ
फूल, अक्षत और एक दीया
सूर्य को अर्पित करने हेतु स्वच्छ जल
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति निश्चित तिथि वाले कुछ हिंदू त्योहारों में से एक क्यों है?
यह अधिकांश हिंदू त्योहारों के आधार बने चंद्र पंचांग के बजाय सौर पंचांग (सूर्य की गति से जुड़े) का अनुसरण करता है, जिससे इसकी तिथि प्रत्येक वर्ष लगभग स्थिर रहती है।
तिल-गुड़ की मिठाई बाँटने का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?
यह 'तिल गुड़ खाओ और मीठा बोलो' का पारंपरिक भाव है, जो सद्भावना और सौहार्द को प्रोत्साहित करता है।
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