मंगला गौरी व्रत पूजा

मंगला गौरी व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा श्रावण मास के मंगलवारों को रखा जाता है, जिसमें देवी गौरी से वैवाहिक सुख और पति की कुशलता हेतु प्रार्थना की जाती है।

90 min फिजिकल Ekadashi & Vrat Pujas

क्यों करें मंगला गौरी व्रत पूजा?

  • वैवाहिक सुख और पति की दीर्घायु हेतु प्रार्थना करता है
  • सुखी गृहस्थी हेतु देवी गौरी के आशीर्वाद का सम्मान करता है
  • श्रावण मास की एक शुभ मासिक परंपरा को जीवंत रखता है

कब करें मंगला गौरी व्रत पूजा ?

पवित्र श्रावण मास (सामान्यतः जुलाई-अगस्त) के मंगलवारों को मनाया जाता है।

कैसे की जाती है मंगला गौरी व्रत पूजा ?

  1. संकल्प एवं उपवास
    व्रत का आरंभ संकल्प और दिनभर के उपवास से होता है।
  2. गौरी पूजा
    सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित कर देवी गौरी की पूजा की जाती है।
  3. कथा एवं आरती
    मंगला गौरी की कथा सुनाई जाती है, तत्पश्चात आरती की जाती है।

आवश्यक सामग्री

  • देवी गौरी की मूर्ति या चित्र
  • सोलह श्रृंगार की सामग्री (चूड़ियाँ, सिंदूर आदि)
  • प्रसाद हेतु फूल और मिठाई

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह व्रत कितने मंगलवारों को रखा जाता है?

यह सामान्यतः श्रावण मास में आने वाले सभी मंगलवारों को रखा जाता है।

क्या नवविवाहित महिलाएँ विशेष रूप से यह व्रत रख सकती हैं?

हाँ, यह विशेष रूप से नवविवाहित महिलाओं में लोकप्रिय है, हालाँकि किसी भी विवाहित महिला द्वारा यह रखा जा सकता है।

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