मुंडन / चूड़ाकरण
मुंडन (चूड़ाकर्म) बालक का पारंपरिक प्रथम केश-मुंडन संस्कार है, जो पूर्वजन्म की अशुद्धियों को दूर करने और एक नई, आशीर्वादित शुरुआत का प्रतीक है।
60 min फिजिकल Birth & Child Rituals क्यों करें मुंडन / चूड़ाकरण?
- परंपरा के अनुसार पूर्वजन्म की अशुद्धियों का प्रतीकात्मक निवारण करता है
- बालक के बालों एवं शरीर हेतु स्वास्थ्य और शक्ति का आह्वान करता है
- परिवार के साथ मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण बाल्यकालीन संस्कार है
कब करें मुंडन / चूड़ाकरण ?
सामान्यतः एक से तीन वर्ष की आयु के बीच, किसी शुभ तिथि पर, प्रायः मंदिर में या परिवार की उपस्थिति में घर पर की जाती है।
कैसे की जाती है मुंडन / चूड़ाकरण ?
- संकल्प
माता-पिता बालक का नाम एवं समारोह का उद्देश्य बताते हुए संकल्प लेते हैं।
- गणेश एवं कुल देवता पूजन
भगवान गणेश एवं कुल देवता से आशीर्वाद आमंत्रित किया जाता है।
- मुंडन (केश-मुंडन)
सामान्यतः किसी नाई द्वारा बालक का सिर मुंडाया जाता है, जबकि पंडित जी सुरक्षा हेतु मंत्रोच्चार करते हैं।
- आरती एवं आशीर्वाद
समापन पर आरती की जाती है और बड़े-बुजुर्ग बालक को आशीर्वाद देते हैं।
आवश्यक सामग्री
- नया उस्तरा/ब्लेड (नाई हेतु)
- बाल एकत्र करने हेतु कपड़ा
- फूल, अक्षत और एक दीया
- प्रसाद हेतु मिठाई
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बालक के केश क्यों मुंडाए जाते हैं?
परंपरा के अनुसार यह जन्म से चली आ रही अशुद्धियों को दूर करता है और स्वस्थ नए बालों की वृद्धि के साथ-साथ आध्यात्मिक आशीर्वाद भी आमंत्रित करता है।
मुंडन सामान्यतः कहाँ किया जाता है?
यह घर पर, परिवार के मंदिर में, या कुछ परिवारों द्वारा इस अनुष्ठान हेतु शुभ माने जाने वाले तीर्थ स्थलों पर किया जा सकता है।
+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो
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