निष्क्रमण संस्कार वह पारंपरिक समारोह है जो शिशु के घर से पहली बार बाहर निकलने को चिह्नित करता है, जिसमें शिशु को सूर्य, चंद्रमा और बाहरी दुनिया से औपचारिक रूप से परिचित कराते हुए दिव्य सुरक्षा की कामना की जाती है।
45 min फिजिकल Birth & Child Rituals
क्यों करें निष्क्रमण संस्कार?
शिशु के बाहरी दुनिया से पहले परिचय हेतु दिव्य सुरक्षा की कामना
एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक-बाल्यकाल संस्कार का प्रतीक
जीवनशक्ति हेतु सूर्य और चंद्रमा से आशीर्वाद का आह्वान
कब करें निष्क्रमण संस्कार ?
परंपरागत रूप से जन्म के चौथे महीने में किया जाता है, जिसमें पहले शिशु को चंद्रमा और बाद में सूर्य दिखाया जाता है, किसी शुभ दिन पर।
कैसे की जाती है निष्क्रमण संस्कार ?
संकल्प
माता-पिता शिशु का नाम और समारोह का उद्देश्य बताते हुए संकल्प लेते हैं।
सूर्य-चंद्र दर्शन
शिशु के स्वास्थ्य और जीवनशक्ति हेतु मंत्रों का जाप करते हुए शिशु को संक्षिप्त रूप से सूर्य या चंद्रमा दिखाया जाता है।
आशीर्वाद
समारोह के समापन से पहले परिवार के बुजुर्ग शिशु को आशीर्वाद देते हैं।
आवश्यक सामग्री
दर्शन हेतु एक आरामदायक बाहरी या खिड़की वाला स्थान
फूल और अक्षत
घर की वेदी हेतु एक दीया
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चंद्रमा को सूर्य से पहले क्यों दिखाया जाता है?
परंपरा के अनुसार, चंद्रमा का सौम्य प्रकाश शिशु के बाहरी दुनिया से पहले परिचय के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है, जिसके बाद सूर्य दर्शन होता है।
क्या यह समारोह आज भी सामान्यतः किया जाता है?
यह आज अन्य जन्म संस्कारों की तुलना में कम प्रचलित है, लेकिन कई परिवार अभी भी इसका एक सरल रूप मनाते हैं।
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+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो