संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा
संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित एक मासिक अनुष्ठान है, जो उपवास और प्रार्थना के माध्यम से बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करने की कामना करता है।
60 min फिजिकल और ऑनलाइन Ekadashi & Vrat Pujas क्यों करें संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा?
- जीवन की बाधाओं और कठिनाइयों के निवारण की कामना करता है
- हर माह नई शुरुआत के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद आमंत्रित करता है
- नियमित, अनुशासित भक्ति अभ्यास का समर्थन करता है
कब करें संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा ?
यह प्रत्येक चंद्र मास में पूर्णिमा के बाद चौथे दिन (चतुर्थी) को मनाया जाता है।
कैसे की जाती है संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा ?
- संकल्प एवं उपवास
भक्त संकल्प लेते हुए पूरे दिन उपवास रखता है।
- गणेश पूजा
फूलों, मोदक और मंत्रों के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
- चंद्र दर्शन
पारंपरिक रूप से संध्या में चंद्रमा देखने के बाद व्रत तोड़ा जाता है।
आवश्यक सामग्री
- भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र
- अर्पण के लिए मोदक या मिठाइयां
- फूल, अक्षत और दीया
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संकष्टी चतुर्थी गणेश चतुर्थी से किस प्रकार भिन्न है?
संकष्टी चतुर्थी एक मासिक अनुष्ठान है, जबकि गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म का उत्सव मनाने वाला बड़ा वार्षिक त्योहार है।
क्या इस व्रत के लिए उपवास अनिवार्य है?
उपवास पारंपरिक है परंतु प्रथाएं व्यक्तिगत क्षमता और पारिवारिक रिवाज के अनुसार भिन्न होती हैं।
+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो
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