तुलसी विवाह
तुलसी विवाह तुलसी के पौधे का भगवान विष्णु (या शालिग्राम) के साथ विधिवत विवाह है, जो वर्षा ऋतु के समापन और शुभ विवाह ऋतु के आरंभ का प्रतीक है।
240 min फिजिकल Festival Pujas क्यों करें तुलसी विवाह?
- हिंदू विवाह ऋतु के शुभ आरंभ को चिह्नित करता है
- हिंदू परंपरा में तुलसी के पवित्र स्थान का सम्मान करता है
- परिवार की अपनी संतानों के सुखी विवाह के लिए आशीर्वाद का आह्वान करता है
कब करें तुलसी विवाह ?
यह तुलसी विवाह के दिन, प्रायः कार्तिक मास (अक्टूबर-नवंबर) की एकादशी या द्वादशी तिथि को मनाया जाता है।
कैसे की जाती है तुलसी विवाह ?
- श्रृंगार
तुलसी के पौधे को वधू की तरह सजाया जाता है, साथ ही वर के रूप में शालिग्राम या कृष्ण की प्रतिमा रखी जाती है।
- कन्यादान विधि
पारंपरिक हिंदू विवाह की तरह एक प्रतीकात्मक विवाह समारोह किया जाता है।
- आरती
दांपत्य सुख की प्रार्थना के साथ समापन आरती की जाती है।
आवश्यक सामग्री
- एक तुलसी का पौधा
- शालिग्राम या कृष्ण की प्रतिमा
- विवाह की सजावट, फूल और प्रसाद के लिए मिठाइयाँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तुलसी का विवाह विष्णु से क्यों किया जाता है?
इसका संबंध तुलसी की भक्ति से जुड़ी एक पौराणिक कथा से है, और यह अनुष्ठान चातुर्मास के समापन तथा विवाह ऋतु के पुनः आरंभ का शुभ प्रतीक माना जाता है।
तुलसी विवाह घर पर होता है या मंदिर में?
दोनों जगह होता है — कई परिवार इसे घर पर तुलसी के पौधे के साथ करते हैं, जबकि मंदिरों में प्रायः विस्तृत सामूहिक आयोजन होते हैं।
+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो
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