उगादी पूजा

उगादी पूजा तेलुगु और कन्नड़ नववर्ष को चिह्नित करती है, जिसे उगादी पचड़ी — छह स्वादों का संतुलन बनाने वाला व्यंजन, जो जीवन के विविध अनुभवों का प्रतीक है — बनाकर और आने वाले वर्ष के लिए प्रार्थना करके मनाया जाता है।

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क्यों करें उगादी पूजा?

  • नववर्ष की शुभ, चिंतनशील शुरुआत को चिह्नित करता है
  • आने वाले वर्ष में समृद्धि और संतुलन के आशीर्वाद का आह्वान करता है
  • एक प्रिय क्षेत्रीय नववर्ष परंपरा का उत्सव मनाता है

कब करें उगादी पूजा ?

यह उगादी के दिन, चैत्र मास के प्रथम दिन (सामान्यतः मार्च-अप्रैल), चंद्र नववर्ष के अनुरूप मनाई जाती है।

कैसे की जाती है उगादी पूजा ?

  1. संकल्प
    नववर्ष के लिए पूजा के उद्देश्य को बताते हुए संकल्प लिया जाता है।
  2. उगादी पचड़ी
    छह स्वादों (मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा, कसैला) से युक्त एक विशेष व्यंजन तैयार कर बाँटा जाता है।
  3. पंचांग श्रवणम्
    नववर्ष का पंचांग सुनाया जाता है, जिसमें वर्ष के लिए भविष्यवाणियाँ बताई जाती हैं।

आवश्यक सामग्री

  • उगादी पचड़ी की सामग्री (गुड़, नीम, इमली आदि)
  • फूल, अक्षत और दीया
  • द्वार सजावट के लिए आम के पत्ते (तोरणम)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उगादी पचड़ी किसका प्रतीक है?

इसके छह स्वाद जीवन में आने वाली विविध भावनाओं और अनुभवों — हर्ष, दुख, क्रोध, घृणा, आश्चर्य और भय — का प्रतीक हैं, जिन्हें एक साथ स्वीकार किया जाना है।

क्या उगादी और गुड़ी पड़वा एक ही दिन होते हैं?

हाँ, दोनों एक ही चंद्र नववर्ष की तिथि को चिह्नित करते हैं, जिसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में उगादी तथा महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा कहा जाता है।

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