विवाह पंचमी पूजा भगवान राम और माता सीता के दिव्य विवाह की स्मृति में मनाई जाती है, जिसे प्रार्थनाओं और उत्सव के साथ मनाया जाता है, जो अयोध्या और मिथिला परंपराओं में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
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क्यों करें विवाह पंचमी पूजा?
भगवान राम और माता सीता के पवित्र मिलन की स्मृति मनाती है
उनके मिलन से प्रेरित होकर दांपत्य सामंजस्य के आशीर्वाद का आह्वान करती है
कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में विशेष भक्ति महत्व रखती है
कब करें विवाह पंचमी पूजा ?
यह मार्गशीर्ष मास (सामान्यतः नवंबर-दिसंबर) की पंचमी तिथि, विवाह पंचमी के दिन मनाई जाती है।
कैसे की जाती है विवाह पंचमी पूजा ?
संकल्प
पूजा के भक्ति उद्देश्य को बताते हुए संकल्प लिया जाता है।
राम-सीता पूजा
फूलों और मंत्रों के साथ भगवान राम और माता सीता की संयुक्त पूजा की जाती है।
आरती
प्रायः उनकी विवाह कथा के पाठ के साथ समापन आरती की जाती है।
आवश्यक सामग्री
राम और सीता की प्रतिमाएँ या चित्र
फूल, अक्षत और दीया
प्रसाद के लिए मिठाइयाँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या विवाह पंचमी पूरे भारत में व्यापक रूप से मनाई जाती है?
इसका विशेष महत्व कुछ क्षेत्रों में है, विशेष रूप से अयोध्या और मिथिला (माता सीता की जन्मभूमि) में, हालाँकि अन्य स्थानों के भक्त भी इसे मनाते हैं।
क्या यह वास्तविक विवाहों के लिए एक शुभ तिथि है?
इस विशेष बिंदु पर ज्योतिषियों के विचार भिन्न-भिन्न होते हैं — पंडित जी आपके परिवार की परंपरा और वर-वधू की विशिष्ट कुंडली के आधार पर सलाह दे सकते हैं।
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