वार्षिक पुण्यतिथि पूजा (बरसी)

बरसी (वार्षिक श्राद्ध पूजा) हर वर्ष किसी प्रियजन के निधन की वर्षगांठ पर की जाती है, जिसमें उनकी स्मृति का सम्मान करने और उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना और स्मरण किया जाता है।

120 min फिजिकल Death & Ancestral Rituals

क्यों करें वार्षिक पुण्यतिथि पूजा (बरसी)?

  • दिवंगत आत्मा का श्रद्धापूर्वक सम्मान और स्मरण करता है
  • आत्मा के लिए निरंतर शांति और आशीर्वाद का आह्वान करता है
  • परिवार को हर वर्ष अपने प्रियजन को याद करने के लिए एक साथ लाता है

कब करें वार्षिक पुण्यतिथि पूजा (बरसी) ?

यह पारिवारिक परंपरा के अनुसार, हिंदू पंचांग की तिथि या अंग्रेज़ी कैलेंडर की तारीख के हिसाब से, निधन की वार्षिक तिथि पर की जाती है।

कैसे की जाती है वार्षिक पुण्यतिथि पूजा (बरसी) ?

  1. संकल्प
    परिवार पंडित जी के समक्ष दिवंगत का नाम लेकर स्मरण करते हुए संकल्प लेता है।
  2. तर्पण
    दिवंगत आत्मा की स्मृति में जल अर्पण किया जाता है।
  3. हवन और प्रार्थना
    आत्मा की निरंतर शांति के लिए हवन और प्रार्थना की जाती है।
  4. ब्राह्मण भोज
    दिवंगत की स्मृति में किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराया जाता है।

आवश्यक सामग्री

  • तर्पण हेतु जल, काले तिल और कुशा घास
  • हवन सामग्री
  • दिवंगत की एक तस्वीर
  • ब्राह्मण भोज हेतु भोजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बरसी हर साल एक जैसी होती है?

मुख्य अनुष्ठान हर साल लगभग समान रहते हैं, हालांकि आयोजन का स्तर परिवार के अनुसार भिन्न हो सकता है।

क्या यह परिवार के पैतृक स्थान से दूर भी किया जा सकता है?

हाँ, यह परिवार जहां भी वर्तमान में निवास करता है वहां, या पंडित जी के मार्गदर्शन में ऑनलाइन भी किया जा सकता है।

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+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो

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