दिवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश)

दीपावली पूजा (लक्ष्मी-गणेश) दीपावली पर्व की मुख्य विधि है, जिसमें समृद्धि, बुद्धि और विघ्न-विनाश के लिए देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा की जाती है।

90 min फिजिकल और ऑनलाइन Festival Pujas

क्यों करें दिवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश)?

  • आने वाले वर्ष के लिए धन और समृद्धि का आह्वान करता है
  • भगवान गणेश के आशीर्वाद से बाधाओं का निवारण होता है
  • परिवार के साथ रोशनी के सबसे व्यापक रूप से मनाए जाने वाले पर्व का प्रतीक है

कब करें दिवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश) ?

यह कार्तिक मास की अमावस्या, यानी दीपावली के मुख्य दिन, संध्या के समय संपन्न की जाती है।

कैसे की जाती है दिवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश) ?

  1. संकल्प
    परिवार पंडित जी के समक्ष पूजा के उद्देश्य को बताते हुए संकल्प लेता है।
  2. गणेश-लक्ष्मी पूजा
    भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की संयुक्त पूजा फूलों, दीयों और मंत्रों के साथ की जाती है।
  3. कुबेर पूजा (वैकल्पिक)
    धन की सुरक्षा हेतु भगवान कुबेर की भी साथ में पूजा की जा सकती है।
  4. आरती एवं दीपदान
    अंत में आरती की जाती है और घर भर में दीये जलाए जाते हैं।

आवश्यक सामग्री

  • लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियां या चित्र
  • दीये, तेल और रुई की बत्तियां
  • फूल, कुमकुम और प्रसाद हेतु मिठाइयां

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्मी और गणेश की पूजा साथ में क्यों की जाती है?

गणेश जी बाधाओं को दूर करते हैं, जिससे लक्ष्मी जी का धन और समृद्धि का आशीर्वाद सुगमता से प्रवेश कर सके — इसी कारण दोनों की पूजा एक साथ की जाती है।

संध्या का कौन सा समय इस पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है?

प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) को पारंपरिक रूप से सबसे शुभ माना जाता है, और पंडित जी आपके शहर के लिए सटीक मुहूर्त बता सकते हैं।

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+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो

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