गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण द्वारा गांववासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाने हेतु गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का स्मरण कराती है, जिसे पर्वत के आकार में सजाए गए भोजन (अन्नकूट) के भोग के साथ मनाया जाता है।
60 min फिजिकल Festival Pujas
क्यों करें गोवर्धन पूजा?
भगवान कृष्ण की सुरक्षा और करुणा का सम्मान करता है
प्रकृति और ईश्वर के प्रति जीविका हेतु कृतज्ञता व्यक्त करता है
दीपावली पर्व अवधि के दौरान प्रचुर भोजन भोग के साथ एक आनंदमय दिन का प्रतीक
कब करें गोवर्धन पूजा ?
यह दीपावली के अगले दिन (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) को मनाई जाती है।
कैसे की जाती है गोवर्धन पूजा ?
गोवर्धन प्रतिकृति
गोवर्धन पर्वत का प्रतीक स्वरूप छोटा टीला (प्रायः गोबर या भोजन से) बनाया जाता है।
अन्नकूट भोग
विविध प्रकार के व्यंजन तैयार कर अन्नकूट (भोजन का पर्वत) के रूप में अर्पित किए जाते हैं।
कृष्ण पूजा
भगवान कृष्ण की पूजा प्रार्थना और गोवर्धन प्रतिकृति की परिक्रमा के साथ की जाती है।
आवश्यक सामग्री
गोवर्धन प्रतिकृति हेतु सामग्री
अन्नकूट के लिए विविध व्यंजन
फूल और दीया
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अन्नकूट क्या है?
इसका अर्थ है 'भोजन का पर्वत' — विभिन्न व्यंजनों का एक विशाल भोग एक साथ सजाया जाता है, जो प्रचुरता और कृतज्ञता का प्रतीक है।
क्या गोवर्धन पूजा गायों से भी जुड़ी है?
हां, गाय पूजन भी प्रायः इसमें शामिल होता है, जो गोवर्धन कथा और कृष्ण के गोपाल जीवन में उनकी भूमिका का सम्मान करता है।
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