गुड़ी पड़वा पूजा

गुड़ी पड़वा पूजा महाराष्ट्रीय और कोंकणी नववर्ष को चिह्नित करती है, जिसे गुड़ी (सजी हुई ध्वजा) फहराकर तथा नए वर्ष में समृद्धि एवं सौभाग्य हेतु प्रार्थना करके मनाया जाता है।

60 min फिजिकल Festival Pujas

क्यों करें गुड़ी पड़वा पूजा?

  • नए वर्ष की शुभ, आनंददायक शुरुआत को चिह्नित करता है
  • आने वाले वर्ष के लिए समृद्धि और सौभाग्य का आह्वान करता है
  • एक प्रिय क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपरा का उत्सव मनाता है

कब करें गुड़ी पड़वा पूजा ?

चैत्र मास के प्रथम दिन (सामान्यतः मार्च-अप्रैल) गुड़ी पड़वा पर यह मनाया जाता है।

कैसे की जाती है गुड़ी पड़वा पूजा ?

  1. गुड़ी फहराना
    विजय और समृद्धि के प्रतीक के रूप में घर के बाहर सजी हुई गुड़ी फहराई जाती है।
  2. पूजा
    शुभ नववर्ष हेतु गुड़ी और कुलदेवताओं की प्रार्थना की जाती है।
  3. नीम-गुड़ भोग
    नीम की पत्तियों और गुड़ का पारंपरिक मिश्रण ग्रहण किया जाता है, जो जीवन में कड़वे और मीठे के संतुलन का प्रतीक है।

आवश्यक सामग्री

  • गुड़ी (बांस की छड़ी, कपड़ा और माला)
  • नीम की पत्तियाँ और गुड़
  • फूल, अक्षत और एक दीया

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुड़ी क्यों फहराई जाती है?

गुड़ी विजय, समृद्धि और नववर्ष के आगमन का प्रतीक है, जो पारंपरिक रूप से दिनभर घरों के बाहर प्रदर्शित की जाती है।

नीम-गुड़ के मिश्रण का क्या अर्थ है?

यह एक प्रतीकात्मक स्मरण है कि जीवन में कड़वे और मीठे दोनों अनुभव आते हैं, जिन्हें नववर्ष में समभाव से स्वीकार करना चाहिए।

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