महाशिवरात्रि पूजा भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण रात्रियों में से एक है, जो उपवास, रात्रि-जागरण और निरंतर प्रार्थना, विशेष रूप से अभिषेक अनुष्ठान के साथ मनाई जाती है।
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क्यों करें महाशिवरात्रि पूजा?
भगवान शिव के आशीर्वाद के लिए सबसे शक्तिशाली रात्रियों में से एक मानी जाती है
पूर्व-कर्म और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में सहायक मानी जाती है
आध्यात्मिक साधकों और भक्त गृहस्थों दोनों के लिए गहरा महत्व रखती है
कब करें महाशिवरात्रि पूजा ?
महाशिवरात्रि पर मनाई जाती है, जो फाल्गुन मास (सामान्यतः फरवरी-मार्च) के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात्रि होती है।
कैसे की जाती है महाशिवरात्रि पूजा ?
संकल्प एवं उपवास
भक्त संकल्प लेते हैं और दिनभर का उपवास रखते हैं।
शिव अभिषेक
रातभर शिवलिंग का दूध, जल, शहद और बेलपत्र से अभिषेक किया जाता है, प्रायः चार प्रहरों में।
जागरण (रात्रि जागरण)
भक्त पूरी रात प्रार्थना, जाप और भक्ति गायन में जागकर बिताते हैं।
व्रत पारण
अगली सुबह व्रत का पारण किया जाता है।
आवश्यक सामग्री
शिवलिंग या भगवान शिव का चित्र
अभिषेक हेतु दूध, शहद, दही और बेलपत्र
रात्रि-भर के जागरण हेतु फूल, धूप और दीये
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाशिवरात्रि रात्रि में क्यों मनाई जाती है?
परंपरा के अनुसार यह विशेष रात्रि भगवान शिव की पूजा के लिए आध्यात्मिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है, इसीलिए रात्रि-भर जागरण और प्रार्थना पर बल दिया जाता है।
क्या इस अवसर पर उपवास रखना अनिवार्य है?
उपवास परंपरागत है परंतु अनिवार्य नहीं — भक्ति और सच्ची प्रार्थना को इस पर्व का मूल तत्व माना जाता है।
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