पुंसवन गर्भावस्था के दौरान परंपरागत रूप से किया जाने वाला एक हिंदू अनुष्ठान है, जो अजन्मे शिशु और गर्भवती माता के स्वास्थ्य तथा कल्याण की कामना के लिए किया जाता है।
60 min फिजिकल Birth & Child Rituals
क्यों करें पुंसवन?
अजन्मे शिशु के स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करता है
गर्भवती माता के कल्याण और सुरक्षित प्रसव का आह्वान करता है
हिंदू जीवन-चक्र परंपरा के सबसे प्रारंभिक संस्कारों में से एक को चिह्नित करता है
कब करें पुंसवन ?
यह परंपरागत रूप से गर्भावस्था के दूसरे या तीसरे महीने में, परिवार की सुविधानुसार चुनी गई शुभ तिथि पर किया जाता है।
कैसे की जाती है पुंसवन ?
संकल्प
दंपति पंडित जी के समक्ष अनुष्ठान का उद्देश्य बताते हुए संकल्प लेते हैं।
गणेश एवं कुल देवता पूजा
भगवान गणेश और कुल देवता का आशीर्वाद आमंत्रित किया जाता है।
हवन
माता और शिशु के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थनाओं सहित एक संक्षिप्त अग्नि अनुष्ठान किया जाता है।
आशीर्वाद
बुजुर्ग गर्भवती माता को आशीर्वाद देते हैं।
आवश्यक सामग्री
हवन सामग्री
फूल और अक्षत
दीया और अगरबत्ती
प्रसाद के लिए फल
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पुंसवन हर गर्भावस्था में किया जाता है?
प्रथा परिवार अनुसार भिन्न होती है — कुछ इसे हर गर्भावस्था में करते हैं, अन्य सीमंतोन्नयन को मुख्य प्रसवपूर्व अनुष्ठान के रूप में महत्व देते हैं।
क्या यह पूजा घर पर की जा सकती है?
हां, यह सामान्यतः निकट परिवार की उपस्थिति में घर पर ही की जाती है।
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+ पंडितजी द्वारा लिया जाने वाला यात्रा शुल्क, यदि लागू हो